तुम्हारे मन से मेरे मन की बात।
(कॉल सेंटर में हुई प्यार की शुरुआत।)
2 दिन पहले ही तुमने join किया है। तुम्हारे पास वाला ही कंप्यूटर खाली है। अभी तक कुछ नहीं हुआ है। अचानक ही तुमने सपोर्ट के लिए कुछ पूछा। बस यही पर बुझी हुई आग में हवा का झोका लगा। वो उलझन भरा चेहरा और फिर अचानक से smile, शब्दों की क्या औकात की वो scene बयां कर दे।
मन में जाग गए कई सवाल पर सोचा थोड़ा इंतज़ार करता हूँ। रोज तुम्हारे पास वाली ही सीट ढूंढता हूँ। पर कम्बख्त कोई ना कोई पहले से ही बैठा रहता है। तुम अभी new हो office में तो तुम्हे पूछने की जरुरत पड़ती है। मैं तैयार बैठा रहता हूँ की तुम मुझसे पूछने आओगी इसी बहाने कुछ बात होगी। लेकिन मेरे पास वाले से पूछकर निकल लेती हो। शायद तुम्हे बिलकुल भी अंदाजा नहीं है कि यहाँ क्या बीत रही है।
ये वो प्यार नहीं और ये दोस्ती भी नहीं है। दूर से ही तुम्हारे उस मुस्कान भरे परेशां चेहरे का आनंद लेता हूँ।
ऐसा मुझे और किसी के साथ नहीं हुआ , तुम शायद औरों की तरह नहीं हो like cool और something.
सोच रहा हूँ तुम्हे बोलू की अपने शिफ्ट के बाद 10 मिनट रुक जाना कुछ बात करेंगे। लेकिन तुम क्यों रुकोगी तुम्हे तो कुछ पता ही नहीं अभी तक।
काम तो ठीक से नहीं हो पा रहा है, तुम्हारा चेहरा और तुम्हारे ख्याल जो आ जाते हैं सामने।
वो दिन आ ही गया और तुम्हारे पास वाली जगह मुझे मिल ही गयी। सोचा आज तो कुछ ना कुछ आगे की बात हो ही जायेगी। तुम्हे सपोर्ट के लिए जो पूछना था तुम पूछती गयी और मैं तुम्हे बेस्ट तरीके से बताता भी गया। तुमने कहा भी "आप अच्छी हेल्प करते हो। " पर तुम्हे क्या पता वजह तो कुछ और है। वरना अपने काम को ignore करके किसी की हेल्प नहीं करता यहाँ।
तुम जब भी कुछ पूछने के लिए मुड़ती हो मेरी तरफ तुम्हारा वो कभी smile और कभी घबराया वाला चेहरा देखकर मुझे जन्नत का एहसास होता है जो की मेरे सामने है पर मेरा नहीं है।
तुम घबरा कर कुछ पूछती हो मुझसे मैं इस तरह बताता हूँ तुम्हे की वो स्माइल तुम्हारे चेहरे पर आ ही जाता है।
तुम्हारे एक sentence जो तुमने मुझसे नहीं कहा पर मैंने सुन लिया।
अभी तो मैंने कुछ कहा भी नहीं था। शायद अच्छा हुआ मैंने कुछ नहीं कहा।
अच्छा हुआ शुरू होने से पहले ही सब ख़त्म हो गया। कुछ दिन परेशान रहूँगा और फिर भूल जाऊंगा। हाँ हाँ वो चेहरा भी। जिसे देखकर पता नहीं क्यों मेरे अंदर सुकून का एहसास होता था।
"मुझे अच्छा नहीं लग रहा यहाँ। मेरी शादी हो जाएगी कुछ दिनों में तो मैं चली जाउंगी यहाँ से।"
यार तुम्हारी शादी तय हो रखी है। तुम मुझे अगर बता देती तो शायद आज मैं इतना परेशान ना होता। पर गलती तुम्हारी भी नहीं ,
तुम्हे तो कुछ पता ही नहीं है अब तक।
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